🤓आपको बुरा क्यों लगा करण जौहर जी?🤔


जिस उम्र में आपने एक फिल्म बनके करोडो कमाए उस उम्र में भारतीय लड़के ये सोच रहे होते हैं की नौकरी पंद्रह हजार की मिल गयी तो पांच लाख तक शादी हो ही जाएगी. आप बड़े बड़े स्टार्स के साथ जब मूवी बन रहे थे तब आपकी उम्र के कई लड़के शादियों में जाने के लिए पापा या मम्मी के सामने नए कपड़ो के लिए रो रहे होएंगे. आप बर्फीले स्विट्ज़रलैंड में कैमरा फिट कर रहे थे यहाँ कोई भाई साहेब ये सोच रहे थे की पुरानी हौंडा सिटी खरीद लेता हूँ ताकि लड़किओं को लगे की पुराने पैसे वाले बाप का बेटा है. आप जो जिंदगी जी रहे हो वो हर लड़के की तमन्ना होती है. पर असल में होता क्या है? सारे के सारे शॉपिंग माल में जाके सेल में बच्चों के कपडे खरीद रहे होते हैं. समझा करो आप. अब आपको अकेले खुश खिलखिलाते हुए देख के आपको ट्रोल नहीं करेंगे तो क्या करेंगे. यहाँ एक साधारण इंजीनियर अगर कंपनी के काम से अमरीका जाता है तो उसके माँ बाप शादी में बड़ी गाड़ी मांगने की सोचने लगते हैं, माँ बेटे के विदेश से लाये टिश्यू पेपर मेहमान के सामने रखती है और आप न्यूयॉर्क में महीनो रहकर “मेने अभी अभी जिसको देखा है” फिल्माते हो. अरे भाई हम तो अमरीका का सोचे भी तो भी पहले वीसा के पैसे गिनते हैं. 

आप अपनी मूवीज में दिखाते हो गुरुकुल बिलकुल उम्मेद भवन पैलेस जैसा. लोग कैसे स्कूल में पढ़ते हैं जहाँ बेंच की साइड में बस्ते टांगने को मिल जाये तो बहुत बड़ी बात है. तो जो आपकी मूवी देख के फिर अगली सुबह टूटी बेंच पे जाकर बैठेगा वो तो आप के ऊपर ही खुन्नस निकलेगा. नईं? अमिताभ बच्चन जी को देखा है आपने? अपने बंगले पे बड़े से स्टूल पे खड़े हो कर जनता को दर्शन देते हैं. आप ट्विटर रूपी बस स्टैंड पे खड़े होके रो रहे हो की बस मुँह पे धुआं मार गयी. अरे पब्लिक है. और कहीं दूर की नहीं है, ये भी बता दूँ.आपकी अपनी पब्लिक है. पूछो कैसे? आपकी पहली मूवी हिट हो गयी और आपने फ़ौरन तय कर लिया की बस अब इन चार पांच बिकाऊ चेहरों के साथ मूवी बनाओ और पैसा कमाओ. भाई आपकी मर्जी आपका पैसा. अब जिसको आप ले नहीं पाते और जो आपसे काम ले नहीं पाता वो कौन सा फूल बरसाएगा? वो आपके द्वारा दुत्कारा जायेगा और दिल की भड़ास दस लोगो पे निकलेगा ही. चाहे आपके सेट्स पे काम करने वाले हो या फिर साथ न काम करने वाले.बाहर वालों को क्या और कैसे पता की आप किसके साथ क्या बात कर रहे हो? है न! 
देखो करण जी यहाँ तो मध्यम वर्गीय ज्यादा है ट्विटर पे. सुबह नाश्ते में अगर माँ ने लाड से दो सब्ज़ियाँ बना भी दीं तो पिताजी एक सब्ज़ी शाम के लिए वापस फ्रिज में रखवा देते हैं. भाई समझा करो, महंगाई मार रही है, मोदीजी वादे पूरे नहीं कर रहे हैं, केजरीवाल जी गाड़ी नहीं चलाने दे रहे, राहुल गांधी प्रधान मंत्री नहीं बन पा रहे हैं, फराह खान के पतिदेव कुंदर जी अलग मोदीजी के जान खाये रहते हैं, बिहार को तीन तीन मुख्यमन्त्रीओं का खर्च उठाना पड़ रहा है,जम्मू कश्मीर में तो पता ही नहीं की बीजेपी ने महबूबा जी के साथ हाथ मिलाया है या फिर किसी अदृश्ये पाकिस्तानी को सत्ता पे काबिज होने में मदद की है, केरल में लोग समझ नहीं पा रहे हैं की चुनाव जीतने के बाद उनका नया मुख्यमंत्री उनके नारियल उनके ही सर पे क्यों फोड़ रहा है, कोलकत्ता का हाल तो आपको पता ही है अच्छे से की वैसे तो दीदी का भद्रलोक है और सबसे लिखे पढ़े लोग बसते हैं वहां पर इनकी गरीब विधवाएं आपको उत्तर प्रदेश के मथुरा वृंदावन में मिलेंगी. तो लब्बोलुआब ये की देश में सत्तर समस्याएं हैं और हर आदमी परेशान है. पर आप अकेले हैं जो मस्तराम मस्ती में आग लगे बस्ती में की जिंदगी जी रहे हो. अब हँसता खेलता आदमी वो भी इकल्ला इठलाता किसको सुहाएगा? तो बुरा मत मनो आप और अपनी जिंदगी जिओ खूब. क्यूंकि आप ही मूवी बनायीं थी… जिसका गाना था न “हर पल यहाँ जी भर जियो, जो है समां कल हो न हो” भगवान् आपको हमेशा खुश रखे और तरक्की दे! आपके बुजुर्ग जहाँ भी होएंगे आपके ऊपर नाज़ करते होंगे जरूर! 


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